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thankyou.
घूमती हुई धरती के वातावरण से ऊपर इस टेलिस्कोप को बह ताकत मिली जिससे अंतरिक्ष में अधिक दूरीतक देख सकता है
thankyou.
इंसानी सभ्यता की शुरुआत से ही हम अपनी आसमान की तरफ देखकर हैरान होते आए हैं,
इसे देख कर हमारे पूर्वजों के मन में कई सवाल उठते रहे जैसे की हमारे यूनिवर्स आखिर कितना पुराना है यह कितना बड़ा है और क्या हम इस पूरे यूनिवर्स में अकेले हैं.?
इसे देख कर हमारे पूर्वजों के मन में कई सवाल उठते रहे जैसे की हमारे यूनिवर्स आखिर कितना पुराना है यह कितना बड़ा है और क्या हम इस पूरे यूनिवर्स में अकेले हैं.?
इंसान इतिहास कि पिछले तीन दशक इस मामले में बहुत ही ज्यादा क्रांतिकारी रहे जिनका सारा श्रेय जाता है हबल टेलीस्कोप को|
घूमती हुई धरती के वातावरण से ऊपर इस टेलिस्कोप को बह ताकत मिली जिससे अंतरिक्ष में अधिक दूरीतक देख सकता है
हमारी आंखों से अरबों गुना ज्यादा शक्तिशाली इस डांस को अपने इस समूचे ब्रह्मांड को हमारे सामने लाकर खड़ा कर दिया
हावेल्स ने हमें दिखाया हमारे यूनिवर्स में कई हैरतअंगेज कर देने वाली चीजे महजूद हे।
जिन का आकार वैसे तो हमारी धरती से खरबों गुना बड़ा है ,लेकिन फिर भी वह हमारा यूनिवर्स का बहुत
जिन का आकार वैसे तो हमारी धरती से खरबों गुना बड़ा है ,लेकिन फिर भी वह हमारा यूनिवर्स का बहुत
छोटा हिस्सा है
हबल ने हमें खरबों मील दूर मौजूद विशाल इलाके में फैले नेबुला की तस्वीरें ली है जिन्हें देखकर हमें लगता है जैसे कुदरत ने स्पेस में कोई पेंटिंग बनाई हो|
हबल की मदद से ही हम यह जान पाए की नेबुला के गैसों के पीछे नए तारे जन्म लेते हैं|
हबल ने हमें यह भी बताया कि ब्लॉक खोल जैसे ऑब्जेक्ट्स वाकई यहां पर मौजूद है ,इसने हमें हमारे ब्रह्मांड के आकार से लेकर इसकी , उम्र तक का अंदाजा लगाने में बहुत मदद की है, साथ ही हम हवल से यह भी जान पाए कि हमारी यूनिवर्स में मौजूद तारों की संख्या हमारी धरती पर मौजूद रेत के कणों से भी कहीं ज्यादा है
हबल की मदद से ही हम यह जान पाए की नेबुला के गैसों के पीछे नए तारे जन्म लेते हैं|
हबल ने हमें यह भी बताया कि ब्लॉक खोल जैसे ऑब्जेक्ट्स वाकई यहां पर मौजूद है ,इसने हमें हमारे ब्रह्मांड के आकार से लेकर इसकी , उम्र तक का अंदाजा लगाने में बहुत मदद की है, साथ ही हम हवल से यह भी जान पाए कि हमारी यूनिवर्स में मौजूद तारों की संख्या हमारी धरती पर मौजूद रेत के कणों से भी कहीं ज्यादा है
हबल स्पेस टेलीस्कोप खगोल विज्ञान की इतिहास में किया गया सबसे साहसिक एक्सपेरिमेंट है
तारों की पैदा होने से लेकर उनकी ब्लॉक होल बनने तक की कहानी हमने इसी टेलिस्कोप से सुनी|
तारों की पैदा होने से लेकर उनकी ब्लॉक होल बनने तक की कहानी हमने इसी टेलिस्कोप से सुनी|
साथ ही हमने यह भी जाना कि हम इस विशाल यूनिवर्स में हम अकेले नहीं हैं बल्कि हमारी धरती जैसी अनगिनत प्लानेट यहां पर मौजूद है|
हबल ने हमें यूनिवर्स की उन रहस्यमई ताकतों के बारे में बताया जिन्हें हम अपने कल्पना और आंखों से भी कभी नहीं देख सकते थे|
हर्बल की नजर से जब हमने अपनी यूनिवर्स को देखा तो हमारे इस को देखने का नजरिया ही बदल गया
लेकिन हवल की खोजो जितनी दिलचस्प उसकी इसकी कहानी है इसकी खुद की कहानी इसकी बनने की कहानी
जिसमें विज्ञान की सबसे बड़ी खोज और एक्सपेरिमेंट शामिल है साथ ही यह विज्ञान की इतिहास में हुई सबसे बड़ी ग़लतियों की कहानी भी है|
हबल ने हमें यूनिवर्स की उन रहस्यमई ताकतों के बारे में बताया जिन्हें हम अपने कल्पना और आंखों से भी कभी नहीं देख सकते थे|
हर्बल की नजर से जब हमने अपनी यूनिवर्स को देखा तो हमारे इस को देखने का नजरिया ही बदल गया
लेकिन हवल की खोजो जितनी दिलचस्प उसकी इसकी कहानी है इसकी खुद की कहानी इसकी बनने की कहानी
जिसमें विज्ञान की सबसे बड़ी खोज और एक्सपेरिमेंट शामिल है साथ ही यह विज्ञान की इतिहास में हुई सबसे बड़ी ग़लतियों की कहानी भी है|
जिन्हें इंसानों ने बड़ी बहादुरी से अपनी जान का खतरा लेकर ठीक किया था | हबल के 27 साल गुजर जाने पर आज आप इस की महान गाथा पढ़ रहे हैं
यह अद्भुत मशीन आखिर बनी कैसे थी, इसकी बनने पर किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा था,
कैसे इसने ब्रह्मांड के सबसे बड़ी रहस्य को सुलझाने में हमारी मदद की? और भविष्य में कैसे यह अपने सफ़र को पूरा करते हुए हमें अलविदा कहेगी?
आखिर कैसे बनी हुब्बेल टेलिस्कोप ....ये बात हम अगले पोस्ट में जानेंगे
जल्द ही आएगी part 2 ...
यह अद्भुत मशीन आखिर बनी कैसे थी, इसकी बनने पर किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा था,
कैसे इसने ब्रह्मांड के सबसे बड़ी रहस्य को सुलझाने में हमारी मदद की? और भविष्य में कैसे यह अपने सफ़र को पूरा करते हुए हमें अलविदा कहेगी?
आखिर कैसे बनी हुब्बेल टेलिस्कोप ....ये बात हम अगले पोस्ट में जानेंगे
जल्द ही आएगी part 2 ...








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